“रुद्राक्ष” शब्द संस्कृत के शब्द रुद्र (भगवान शिव) और अक्ष (आँसू) से बना है। रुद्राक्ष मनका (Rudraksh Beads), ‘रुद्राक्ष के पेड़’ के सूखे बीज हैं, जो मुख्य रूप से हिमालय और दक्षिण पूर्व एशिया में पाए जाते हैं, जिन्हें हिंदू धर्म में “शिव के आँसू” के रूप में माना जाता है। आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक लाभों के लिए प्रसिद्ध, इन पवित्र रुद्राक्ष मनका (Rudraksh Beads) को सुरक्षा, ध्यान और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए पहना जाता है।
यह परामर्श आपको बेहतर जीवन निर्णय लेने और चुनौतियों से निपटने में मदद करने के लिए मार्गदर्शन के साथ-साथ व्यक्तित्व, करियर, रिश्ते, स्वास्थ्य और भविष्य के अवसरों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रकट करने में मदद करता है।The word “Rudraksha” is derived from the Sanskrit words Rudra (Lord Shiva) and Aksha (tears). Rudraksh beads are the dried seeds of the Rudraksha tree, found primarily in the Himalayas and Southeast Asia, which are regarded as the “tears of Shiva” in Hinduism. Known to have spiritual, mental and physical benefits, these sacred Rudraksh beads are worn to promote protection, meditation and stability.
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रुद्राक्ष:
रुद्राक्ष का वर्णन श्री शिवमहापुराण में भी किया गया है।विद्धेश्वरसंहिता के 25 वें अध्याय के श्लोक 1 से लेकर श्लोक 19 के बीच दिया गया है, उसीका वर्णन कर रहे हैं, वैसे तो श्लोक 95 तक रुद्राक्ष के विषय में वर्णन किया गया है।“रुद्राक्ष शिवजी को बहुत प्रिय है। इसे परम पावन समझना चाहिए। रुद्राक्ष के दर्शन से, स्पर्श से, तथा उसपर जप करने से, वह समस्त पापो का अपहरण करनेवाला माना गया है।
पूर्वकाल में परमात्मा शिव जी ने समस्त लोको का उपकार करने के लिए देवी पार्वती के सामने रुद्राक्ष की महिमा का वर्णन किया था।
पूर्वकाल की बात है भगवान शिवजी ने मन को संयम में रखकर हजारो दिव्य वर्षो तक घोर तपस्या में लगे रहे।
एक दिन सहसा भगवान शिवजी का मन क्षुब्ध हो उठा। अत: उस समय भगवान शिव जी ने लीलावश ही अपने दोनों नेत्र खोले।
नेत्र खोलते ही भगवान शिवजी के नेत्रपुटो से कुछ जल की बूंद गिरी। आंसू की उन बूंदों से वहां रुद्राक्ष नामक वृक्ष पैदा हो गए।
भक्तों पर अनुग्रह करने के लिए वे अश्रुबिन्दु स्थावर भाव को प्राप्त हो गए। (भक्तों पर कृपा करने के लिए उन अश्रुबिंदुओं ने स्थायी गति प्राप्त कर ली।)
भोग और मोक्ष की इच्छा रखने वाले चारो वर्णो के लोगो को और विशेषत: शिव भक्तों को शिव-पार्वती की प्रशंसा के लिए रुद्राक्ष के फलो को अवश्य धारण करना चाहिए।
आँवले के फल के बराबर जो रुद्राक्ष हो, वह श्रेष्ठ बताया गया है। जो बेर के फल के बराबर हो, उसे मध्यम श्रेणी का कहा गया है। जो चने के बराबर हो, उसकी गिनती निम्न कोटि में की गई है।
जो रुद्राक्ष बेर के फल के बराबर हो होता है, वह उतना छोटे होने पर भी लोक में उत्तम फल देने वाला तथा सुख सौभाग्य की वृद्धि करने वाला होता है।
जो रुद्राक्ष आवले के फल के बराबर होता है, वह सभी अरिष्टो को विनाश करने वाला होता है, तथा जो गूंजा फल के समान बहुत छोटा है, वह संपूर्ण मनोरथो और फलो की सिद्धि करनेवाला होता है।
पापो के नाश करने के लिए रुद्राक्ष धारण करना आवश्यक बताया गया है। वह निश्चय ही सम्पूर्ण अभिष्ट मनोरथो का साधक है। अत: रुद्राक्ष अवश्य ही धारण करना चाहिए।“
रुद्राक्ष को कैसे पहचानेंगे:
एक मुखी रुद्राक्ष में एक धारी होती है यानि एक ही लाइन दिखती है। 2 मुखी रुद्राक्ष में दो लाइन, 3 मुखी में तीन लाइन, 4 मुखी में 4 लाइन, 5 मुखी में 5 लाइन, 6 मुखी में लाइन दिखती है। इसी तरह से सभी रुद्राक्ष को पहचान सकते हैं।
5 मुखी रुद्राक्ष 6 मुखी रुद्राक्ष
रुद्राक्ष काम कैसे करता है:
रुद्राक्ष के चारो तरह छोटे-छोटे धारिया होते हैं, कहीं उभरा हुआ होता है, तो कहीं गड्ढा होता है। जो उभरा हुआ होता है, उसमें छोटे छोटे छेद होते हैं। जब उभरा हुआ हिस्सा शरीर (Body) से रगड़ खाता है (यानी टच होता है), रगड होने के करण “ इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड” (Electromagnetic Field) तैयार होता है, ये एक तरह की सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) है जो हमारे आभामंडल (Aura) में मिश्रित (Mix) हो जाती है और हमारे अवचेतन मन (Subconscious Mind) को प्रभावित करती है। जब ये ऊर्जा हमारे अवचेतन मन को प्रभावित करती है, तो हमारे अवचेतन मन (Subconscious Mind) में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार होता है, और फिर हमारे जीवन में सकारात्मकता (Positivity) बढ़ने लगती है। शांति को बढ़ावा देता है, हमारे आभा (Aura) को शुद्ध करता है, चक्रों को संतुलित करता है, और पहनने वाले को नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) से बचाता है।
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